सोमवार, 15 अक्तूबर 2012

नेहरु,पटेल व जिन्ना की थकावट का परिणाम देश का विभाजन:जसवंत सिँह ,पुस्तक 'जिन्ना भारत विभाजन के आईने मेँ'

नेहरु और पटेल शुरु मेँ न चाहते हुए भी अंतत:बंटवारे के लिए अपनी सहमति दे गए .('आधी रात की आजादी' लैरी कालिन्स दामिनिक लैपियर की इस पुस्तक मेँ पटेल व नेहरु दोनोँ को लार्ड माउंटबेटन के झांसे मेँ आने के कारण दोनोँ को दोषी माना गया . )जब कई सालोँ बाद लियोनार्ड मोजले ने नेहरु से पूछा कि आपने इस बात को क्योँ मान लिया ? तो उन्होने स्पष्टवादिता से ,लेकिन दुख के साथ जवाब दिया ,'तब तक हम बहुत थके हुए लोग थे और काफी समय तक जेल मेँ रह चुके थे....'

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मेरी प्रतिक्रिया:


ये भी सत्य है कि ये नेता थक चुके थे .अम्बेडकर के अनुसार कांग्रेस सत्तावादियोँ के हाथ मेँ आ चुकी थी.जो पश्चिम से प्रभावित थे .लोहिया के अनुसार,इन सत्तावादियोँ के बीच गांधी अकेले पड़ चुके थे.सत्ता के नशे ने देश का विभाजन करवाया और साम्प्रदायिक दंगे करवाये.यहां तक कि कुछ दिनोँ बाद नेहरु व उनकी टीम को लगा कि देश को संभालना बड़ा मुश्किल है तो फिर वापस माउण्टबेटन को सत्ता गोपनीय तौर पर सौप दी.
नेहरु व बेटन पैक्ट को सुभाषवादी अब भी संदिग्ध समझते हैँ.सुभाष व शास्त्री की मृत्यु पर कांग्रेस को संदिग्ध रुप से देखते हैँ.

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