शनिवार, 15 दिसंबर 2012

सच!देश को कड़ुवी दवा की जरुरत .

वैश्विक आर्थिक मंदी पर चिन्ता व्यक्त करते हुए वित्तमंत्री पी चिदंबरम
कहते हैँ कि अर्थव्यवस्था की सेहत के लिए कुछ कड़वी दवाएं जरुरी हैँ .बिना
त्याग,बलिदान,धैर्य व संयम के सुप्रबंधन नहीँ लाया जा सकता.जो वास्तव मेँ
अभी जनता भी नहीँ चाहती.प्रजातंत्र मेँ मैँ प्रजा को ही दोषी मानता हूँ
.प्रजातंत्र मेँ प्रजा का नजरिया व उसकी जीवनशैली ही कुप्रबंधन व
भ्रष्टाचार के लिए दोषी है.समस्याओँ की मूलजड़ोँ पर मट्ठा डालने वाला
कौटिल्य कौन बनना चाहते है?वैश्वीकरण व संबैधानिक व्यवस्था के बीच हमेँ
कूपमण्डूक व निजी नजरिया व जीवनशैली पर पुनर्विचार की आवश्यकता है .ऐसा
तो है नहीँ कि जितने नजरिया व जीवनशैली उतने राष्ट्र व राज्य खड़े तो किए
नहीँ जा सकते. जहाँ अब विश्वसरकार व दक्षेस सरकार तक की बात होने लगी है
.

ग्राहकोँ तक आते आते किसी वस्तु की कीमत या खर्चा यदि 920 रुपये
आता है तो वह व 920रुपये से कम मेँ ग्राहकोँ कोँ दी जाएं.?लगभग 40करोड़
व्यक्ति गरीब है तो इसके लिए दोषी कौन है?सरकार या ये 40करोड़ गरीब या इन
40करोड़ गरीब को जन्म देने वाले ?किसी अर्थशास्त्री ने कहा है कि गरीबी का
कारण गरीब मानसिकता है.अपने शरीर को पाल नहीँ पाते लेकिन शादी कर बैठते
हैँ,फिर बच्चे.क्या ये मानसिकता गरीबी का कारण नहीँ है?हूँ ,बच्चे भगवान
की देन हैँ.?यदि बच्चे भगवान की देन हैँ तो फिर उनके हालात भी भगवान पर
ही छोंड़ो न.सरकारोँ के सामने रोना क्योँ?दूसरी और मध्यम व उच्चवर्ग के
द्वारा देशभर मेँ औसत रुप से होली पर रंगबाजी,दीपावली पर आतिशबाजी आदि के
नाम से करोड़ोँ रुपये खर्च होजाता है.अनेक जलसोँ व उत्सवोँ मेँ देशभर
लाखोँ टन खाद्यान्न बर्बाद कर दिया जाता है.जो शादी दस हजार मेँ हो सकती
तो उसके लिए लाखोँ खर्च करना क्योँ ?ये क्या मानवता के साथ मजाक नहीँ
?क्या यही धर्म है ?यही धर्म है ?समाज के प्रति क्या कोई कर्त्तव्य
नहीँ?हमेँ यदि देश का नेतृत्व करने को दे दिया जाये तो मैँ तो वेतन
व्यवस्था ही समाप्त कर दूँ .कर्मचारियोँ के लिए सभी सुविधाएं सरकार के
द्वारा मुहैया कराऊँ,कर्मचारियोँ से सिर्फ सरकारी कार्य करवाये
जायेँ,उनके बच्चोँ के लिए सुविधाएँ ,चिकित्सा आदि की व्यवस्था सरकार की
हो,डयूटी इस डयूटी,डयूटी के वक्त कर्मचारी डयूटी ही करे .यदि उसके परिवार
का मेम्बर बीमार है या घर मेँ कोई सामान जुटाना है तो इसके लिए सरकारी
डाक्टर या अन्य कर्मचारी लगेँ.किसी की कोई व्यक्तिगत सम्पत्ति न रह पाये
,सब सम्पत्ति सरकार की हो जाए,न ही कोई वस्तु किसी व्यक्ति की,सभी
वस्तुएं सरकार की रहे .बस,व्यक्ति उनका इस्तेमाल करे.हमने सुना है चीन
मेँ एकल व परिवार नियोजन युक्त परिवार को सरकारी सुविधाएं देने मेँ
वरीयता दी जाती है ?इण्डिया की सरकार उनके लिए क्या विशेष आरक्षण मुहैया
क्योँ नहीँ कराती जो एकल,द्वि या त्रि सदस्यीय परिवार हैँ या जो
सेक्यूलरवादी हैँ और अन्तर्जातीय शादी को बढ़ावा देते हैँ या संवैधानिक
मर्यादाओँ व योजनाओँ को लेकर चल रहे हैँ ?

किसी का सर्वे कहता है कि नब्बे प्रतिशत भारतीयोँ के दिमाग मेँ
कूड़ाकरकट भरा है तो क्या ये गलत है?एक नागरिक को कैसा होना चाहिए ?आदर्श
नागरिक की परिभाषा क्या है?अपनी बन पड़ती है तो कानून का रास्ता दिखता
है,वैसे रोजमर्रे की जिन्दगी मेँ कानून,मर्यादा,सत आदि की बात करने वाला
सनकी माना जाता है . ऐसा है यहाँ की जनता का बौद्धिक व मानसिक स्तर.


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संस्थापक <
manavatahitaysevasamiti,u.p.>

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