रविवार, 4 अक्तूबर 2015

विद्यार्थी व शिक्षक ?????5अक्टूबर

5अक्टूबर::विश्व शिक्षक दिबस???

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अब अभिवावकों में संस्कार खत्म हो रहे हैं.शिक्षक को सिर्फ किताबी कोर्स पूरा करने से फुर्सत नहीं है.शिक्षा जगत का महत्व पूर्ण कार्य है.लेकिन सर्वांगीण शिक्षा का आभाव है.

शिक्षक अब वे होने लगे है  जो वर्ण से वैश्य व शुद्र हैं.विद्यार्थी भी वो हो रहे हैं जिन्हें ज्ञान के प्रति जिज्ञासा नहीं है.आज का विद्यार्थी जीवन ब्रह्मचर्य जीवन नहीं रह गया हैं

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