बुधवार, 13 अप्रैल 2011

गले में फंसी हड्डी !

इण्टरनेट पर खबरइण्डिया ने समाचार दिया है कि राजनैतिक दलों ने विद्यार्थियों को अपने ऐजेण्डे से बाहर कर दिया है.अभी देखो आगे क्या क्या होता है? ऐ राजनैतिक दल आगे चल कर किस स्थिति में होंगे?सब सामने आ जाएगा.जनता को अपनी निगाहें अति पैनी रखनी हैं.जन लोकपाल विधेयक पर संसद के अन्दर जो होगा ,वह सामने आयेगा ही .इससे पूर्व इसके निर्माण पर भी समिति के अन्दर अनेक व्यवधान आयेंगे. अपराध के दलदल में फंसे राजनेताओं की स्थिति कुत्ते के गले मे फँसी हड्डी की तरह हो जाएगी,न उगलते बने न निगलते.फिर ऐसे मे वे झुंझला कर कुछ भी कर सकते है जिसके लिए जनता को सतर्क रहना है.हाँ,ऐसा भी होता है फिल्मों मे एक दो चरित्र ऐसे दिखाये जाते हैं जो कि अपराध के दलदल मे फंस कर खलनायक के समर्थन मे होते है लेकिन फिर जब होश आता है काफी देर हो चुकी होती है .उसकी मौत के साथ ही उसके अपराध की लीला समाप्त होती है या फिर अपना अपराध कबूल नायक के समर्थक हो जाते हैं.




अन्ना जी ,अभी बहुत कुछ सहना पड़ेगा .जिसकी शुरुआत हो चुकी है.30जून आने व लोकपाल विधेयक लागू होने तक शीत युद्ध के साथ साथ अनेक लांच्छन व दबाव से म पड़ेंगे.

केन्द्र सरकार ने कहा है कि लोकपाल के अन्तर्गत उद्योगपति व स्वयंसेवी संस्थाएं भी शामिल होना चाहिए,इस पर मैं सहमत हूँ.प्राइवेट संस्थाओं को भी इसमें शामिल करना चाहिए.

कोई टिप्पणी नहीं: