मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

राजनैतिक दंशोँ की उपेक्षा :अन्ना हजारे

अन्ना हजारे अपने समर्थकों के साथ नई दिल्ली स्थित जन्तर मन्तर पर अनशन करने आ पहुंचे हैं.जन लोकपाल विधेयक लागू करवाने के पक्ष में अनशन का आज पहला दिन था.अपने इस आन्दोलन में किसी राजनैतिक नेता को न बोलने देना, उनकी निष्पक्ष गैरराजनैतिक छवि को दर्शाता है.उनका यह कहना उचित ही है कि इस आन्दोलन का लाभ हम किसी राजनैतिक पार्टी को नहीं उठाने देंगे. इस जनान्दोलन के मंच पर राजनैतिक नेताओं को बोलने का मौका देना जनता की आवाज के खिलाफ है.जनता ने यह दर्शा भी दिया.यदि राजनेताओं को समर्थन ही करना है तो अपने अपने क्षेत्र में अपने समर्थकों के साथ सक्रिय होँ.जैसा कि देश के विभिन्न स्थानों से समर्थन मेँ सक्रियता के समाचार मिल रहे है.



राजनैतिक नेताओं का क्या जन्तर मन्तर पर बोलना आवश्यक ही है? मंच पर बोलने नहीं दिया जा रहा है,यह जान कर अनेक राजनेता अपनी टीम के साथ वापस लौट गये तो इसका मतलब क्या है?देश की जनता इसे खूब समझती है.यह राजनेता समर्थन में वहां रुक कर समर्थन बैठ तो सकते थे.



आखिर आदतें ऐसे कैसे जाएंगी ? और फिर देश के कुप्रबन्धन व भ्रष्टाचार में इन नेताओं का प्रत्यक्ष नहीं तो अप्रत्यक्ष योगदान है ही.सेवा भाव से अभी तक कितनों ने राजनीति की है ?



शेष फिर.....



जय कुरआन जय कुरशान !

OM...AAMEEN!

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