शनिवार, 3 अप्रैल 2010

DANSH : बोर्ड परीक्षा: ऐसे मेँ कैसे हो नकल विहीन परीक्षा?



                              नकल विहीन परीक्षा करवाने सम्बन्धी प्रशासन की बयान प्रति वर्ष मीडिया के सामने आती है लेकिन क्या नकलविहीन परीक्षाएँ ईमानदारी से सम्भव हो सकी हैँ? मैँ अनेक वर्षोँ से कक्ष निरीक्षक बन कर किसी न किसी कालेज मेँ डयूटी करता आया हूँ.मुझे तो कभी नहीँ लगा कि परीक्षाएँ ईमानदारी से नकलविहीन हुई हैँ.कालेज के चपरासी से लेकर प्रधानाचार्य केन्द्र व्यवस्थापक तक अप्रत्यक्ष रुप से भागीदार होते हैँ.दबंग अध्यापक या अभिभावक के सामने तटस्थ हो कर.जब स्थानीय केन्द्र थे तो परीक्षार्थियोँ को इमला बोल कर लिखवाते तक देखा गया. अब जब स्थानीय केन्द्र नहीँ रहते तो भी नकल माफियाओँ की ही चलती है.उनके विद्यालय का जहाँ परीक्षा केन्द्र होता है वहाँ वे इधर उधर की जुगाड़ से अपने माफिक कक्ष निरीक्षक बना कर भेज देते हैँ और वहीँ के कुछ अध्यापकोँ से साँठगाँठ कर अपने कार्य को अन्जाम देते हैँ.जिसकी जानकारी कभी कभी प्रधानाचार्य एवँ केन्द्रव्यवस्थापक तक को नहीँ होती.ईमानदारी से सिर्फ डयूटी करने वाले कक्ष निरीक्षक ऐसे मेँ परेशान होते हैँ.


एक दृश्य --"कुछ वर्ष पहले मैँ एक विद्यालय के एक कक्ष मेँ डयूटी कर रहा होता हूँ कि एक अध्यापक बार बार आकर कुछ परीक्षार्थियोँ को आकर कुछ न कुछ बता कर चले जाते हैँ.मेरे विरोध का असर नहीँ पड़ता .हाँ , हमेँ धमकियाँ जरूर मिलती है.


दूसरा दृश्य--"मैँ एक कमरे मेँ डयूटी कर रहा होता हूँ कि केन्द्रव्यवस्थापक हमेँ बुलवाकर कहते हैँ कि आप का विष्य हिन्दी है जरा बच्चोँ की मदद कर देना. मैँ यह कह कर वापस कक्ष मेँ आगया कि मेरा विषय हिन्दी नहीँ है."

तीसरा दृश्य-- "बिन्दु जी की डयूटी कक्ष मेँ न लगवाओ(भविष्य मेँ आप पढ़ेँगे मेरा ब्लाग-'प्रतिष्ठित अध्यापकोँ के दंश'). "


चतुर्थ दृश्य:हमेँ एक दो बार यह देखने का अवसर मिला है कि कैसे एक कक्ष मेँ एक अच्छे विद्यार्थी के साथ अन्याय होता है?उससे हर हालत मेँ सहयोग लेने के लिए कक्ष निरीक्षक तक तैयार रह व्यवधान पैदा करने की कोशिस करते हैँ.



दृश्य पाँच:कालेज मेँ एक कमरा बन्द होता है.जिसमेँ बाहर से ताला लगा होता है.एक दो गाड़ियाँ कालेज मेँ आकर सब ओके कर चली जाती हैँ.लेकिन........?! उस बन्द कमरे मेँ?! उससे क्या मतलब?वह तो बन्द है?वह बन्द है तो क्या उसमेँ कुछ नहीँ हो सकता?उसमेँ एक अध्यापक प्रश्न पत्र हल कर रहे होते हैँ.कुछ देर बाद वह कमरा खुलता है......एक अध्यापक एक कमरे मेँ पहुँचते हैँ,एक परीक्षार्थी की कापी उठाते हैँ जिसके अन्दर के पन्ने निकाल कर अपने पास रख लेते हैँ,अपनी और से लिखी एक अन्य कापी उस परीक्षार्थी को दे देते हैँ.एक दूसरे अध्यापक हर कक्ष मेँ जा कर इमला बोलने लगते हैँ.




दृश्य छ: :कालेज मेँ कहीँ न कहीँ किसी न किसी के पास मोबाइल तो रहता ही है केन्द्रव्यवस्थापक प्रधानाचार्य आदि से बचते हुए मोबाइल प्रश्नोँ के उत्तर जानने मेँ सहायक हो जाता है.





दृश्य सात: एक कमरे मेँ मैँ डयूटी कर रहा होता हूँ . जहाँ एक अध्यापक एक परीक्षार्थी के पास खड़े पेपर हल करवा रहे थे जिसका मैने विरोध किया.कुछ मिनट बाद जब वह परीक्षार्थी की कापी पर लिखने लगे तो मैँने फिर विरोध किया.बाहर घूम रहे सर्च दस्ते के एक अध्यापक को मैने अन्दर बुला अपनी आपत्ति बतायी तो सम्बन्धित अध्यापक की डयूटी कैँसिल कर दी गयी लेकिन
विद्यालय के कुछ प्रतिष्ठित अध्यापक इस घटना के विरोध मेँ आगये थे.


दृश्य आठ:जो छिनरा वही डोली के संग.......कुछ प्रतिष्ठित अध्यापक जो किसी न किसी माध्यम से विद्यालय प्रशासन पर हावी रहते हैँ और मनमानी कर परीक्षार्थियोँ के साथ पक्षपात करते हैँ एवं ईमानदार या अपने प्रतिकूल अध्यापकोँ उनकी छोटी गलती पर भी प्रतिक्रिया करते फिरते हैँ.



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