सोमवार, 12 अप्रैल 2010

लघु कथा :शिल्पा से सेर���ना (कोई है मेरी कल्पन��ओँ का खरीददार?जिसको म���लेगा कुछ शर्तोँ के आधार पर मेरे जीवन भर की मेरी कल्पनाओँ पर कापीराइट,चाहेँ होँ तश्वीरे कहानी उपन्यास मानचित्र या अन्य)

सन2165ई0की मार्च!

भविष्य त्रिपाठी राघवेन्द्र खन्ना के साथ उपस्थित था.जो कि दोनोँ अब
'साईबोर्ग' थे.

दोनोँ के बीच सम्वाद चल रहा था-
"दस करोड़ इक्कीस वर्ष पहले टेथिस सागर द्वारा विभाजित इण्डो आस्ट्रेलियन और यूरेशियन प्लेट,जो पहली बार करीब छ: करोड़ वर्ष पहले टकरायी.जो प्रति वर्ष एक दूसरे के तरफ दो इंच खिसकती रही थी.लेकिन...."

" एक पुस्तक' जय कुरुशान जय कुरुआन'से जानकारी मिलती है कि सिन्धु घाटी सभ्यता के नष्ट होने एवं आर्योँ के हिन्दुकुश क्षेत्र से पलायन का कारण इण्डो आस्ट्रेलियन और यूरेशियन प्लेट के करीब आने से आया भूकम्प ही था. "

"यह सत्य हो सकता है लेकिन.... "


"अरे छोड़ो!हाँ,भविष्य ! ...तो पुष्प कन्नौजिया को फिर आप मरने से क्योँ नहीँ बचा पाये?उसको भी साईबोर्ग बनाया जा सकता था. "



" पुष्प साईबोर्ग बनने के खिलाफ था.प्रकृति पर अपनी इच्छाएँ थोपने के खिलाफ था. हालाँकि विज्ञान के सहयोग से वह एक सौ सात वर्ष तक जिया था."


" तो इस हिसाब से........ "


"वह 26जून2100ई0को इस दुनिया से चला गया. "


"सेरेना 'आज्ञा'की बड़ी बहिन थी लेकिन..... "


" जब मै मीरानपुर कटरा मेँ था तो आज्ञा से मेरी मुलाकात होती रहती थी.हालाँकि वह आदर्श इण्टर कालेज मेँ पढ़ती थी और मैँ श्री बलवन्त सिँह इण्टर कालेज मेँ . उसने एक बार मुझे अपनी बड़ी बहिन सेरेना के बारे मेँ बताया था. "


"क्या? "


" अपना घर छोड़ने से पहले सेरेना का नाम था-शिल्पा सिँह . "


"तो सेरेना अर्थात शिल्पा सिँह को अपना घर क्योँ छोड़ना पड़ा?"



"दरअसल......"


फिर--


सेरेना उर्फ शिल्पा सिँह.....?!


अब वह एक शोध छात्रा थी.हालाँकि वह अभी शादी नहीँ करना चाहती थी लेकिन माता पिता के दबाव मेँ आकर शादी करनी पड़ी . उसे अपना पति पसन्द न आया,वह दारू पीता था और हर रात नई नई लड़कियोँ से सम्बन्ध स्थापित करता था . जब शिल्पा सिँह ने विरोध करना शुरू कर दिया तो वह उसे पीटने लगा .

जीवन जीने का मतलब यह तो नहीँ कि घुट घुट कर जिओ और फिर क्या व्यक्तिगत जीवन?कम से कम व्यक्तिगत जीवन तो सहज रहे ! यह तथाकथित अपने या परिजन कैसे?जब अपने करीब के लोगोँ का दुख दर्द तथा भावनाओँ को न समझ पायेँ.जब समाज से भी हमदर्दी न मिले तो.....!?मनुष्य तो सामाजिक प्राणी है लेकिन जब वह निर्दोष हो कर भी समाज से अलग थलग पड़ने लगे तो क्या स्थान परिवर्तन आवश्यक नहीँ हो जाता?सम्मान से अपना जीवन जीने का हक सभी को है.

फिर--

शिल्पा सिँह ने अपने पति से तलाक ले लिया.

ससुराल पक्ष एवं मायके वाले उससे नाराज हो ही गये ,समाज मेँ भी उस पे लोग उँगलियाँ उठाने लगे.वह एक प्राइवेट स्कूल मेँ पढ़ाने लगी और अपने शोध कार्य मेँ लग गयी लेकिन समाज की और से मिलने वाले कमेन्टस उसे परेशान करने लगे.

एक दिन उसकी मुलाकात जी एफ कालेज शाहजहाँपुर मेँ एक सेमीनार कार्यक्रम के दौरान एक पादरी से हुई.जिसके दार्शनिक भाषण से वह काफी प्रभावित हुई.फिर वह सम्बन्धित चर्च मेँ प्रति रविवार प्रार्थना सभा मेँ जाने लगी.लगभग एक वर्ष बाद वह मतान्तरण कर शिल्पा सिँह से सेरेना बन गयी.


सेरेना की आत्म कथा -'मेरे जीवन के कुछ पल ' दीवार मेँ फिट स्क्रीन पर थी . सेरेना की आत्म कथा के आधार पर--
सेरेना के एक मार्गदर्शक थे,जिन्हेँ वह 'सर जी' कह कर पुकारती थी.उससे मिलने वाली लड़कियोँ मेँ एक थी शिवानी.उसे और सर जी को लेकर समाज विद्यालय एवं स्वयं शिवानी मेँ भ्रम शंका पैदा हो गयीँ थी.शिवानी की तरह पुष्प भी सर जी के स्ऩेह के पात्र बन चुके थे.

* * * *


अब सन5020ई0 की 10 सितम्बर !

आरदीस्वन्दी का जन्म दिन ! लाखोँ प्रकाश दूर सनडेक्सरन धरती पर पिरामिड आकार की एक भव्य बिल्डिँग मेँ आरदीस्वन्दी किशोरी का जन्म दिन मनाया जाना था .

अग्नि क्लोन पद्धति का स्पेशलिस्ट था.अपनी प्रयोगशाला मेँ वह एक क्लोन के सामने उपस्थित था .

यह युवक सम्कदेल वम्मा का प्रतिरुप !जिसे ले कर अग्नि आरदीस्वन्दी की बर्थ डे पार्टी मेँ उपस्थित हुआ.जब आरदीस्वन्दी ने इस प्रतिरुप को देखा तो-

"सम्कदेल ! "

वह तेजी के साथ सम्कदेल वम्मा के प्रतिरुप के पास जा पहुँची लेकिन फिर -

"सम्कदेल !वह तो मर चुका है तो फिर आप ........!क्षमा! "

तेजी से अग्नि के पास आकर -

"अग्नि अण्कल!जरुर यह आपकी कृति होगी लेकिन यह हमारे उस सम्कदेल का स्थान नहीँ ले सकती."


" आरदीस्वन्दी! जैसा तुम सम्कदेल वम्मा से व्यवहार करती थी वैसा ही इसके साथ करके देखो . पता चल जायेगा कि यह बिल्कुल सम्कदेल वम्मा ही है."

" अच्छा,तो ऐसी बात ! देखूँगी."


लेखक:अशोक कुमार वर्मा 'बिन्दु'

E.MAIL:akvashokbindu@gmail.com

शेष फिर....

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