रविवार, 9 जून 2013

अंतिम इच्छा

कुछ लोगो के कहने के बाबजूद हम अपने परिजनोँ व कुछ अन्य सहयोगियोँ के
साथ उस मकान मेँ रहने लगा था.अनेक व्यक्तियोँ ने कहा था कि इस मकान मेँ
मत रहना ,अशुभ व प्रेत बाधा युक्त है .हम मुस्कुरा कर बोले कि मन मेँ
भगवान तन मेँ निदान .सब प्रभु माया नगेटिव हो या पाजटिव.भय
क्योँ?सुप्रबंधन,अध्यात्म ,भगवत्ता,मानवता आदि के लिए तथा अभय भी इसीलिए
न मोह ,लोभ के लिए न ही सिर्फ ऐन्द्रिक लाभ के लिए भय अभय.

तीन दिन बाद प्रतिकार की उम्मीद जताई जा रही थी .एक बोला ये मकान
किसी को नसीब नहीँ हुआ.जो भी आया मौत के भवर मेँ समा गया .हम बोले क्या
है जगत क्या है ब्रह्म और जीवन ?जब ये जान जाओगे तो सारे भ्रम ,भेद व भय
दूर हो जाएंगे .मौत तो एक बार आनी ही है .डर क्या हम कदम पीछे हटा लेँ
?क्षत्रिय होकर भी कायरता भी बातेँ ?हम ब्रह्म को स्मरण मेँ रख मकान मेँ
घुस गया लोग हमेँ डराते तो रहे लेकिन मेरे करीब न आये.एक व्यक्ति ने सलाह
दी कि इस मकान मेँ रहने के लिए आफिस से लिखित अनुमति ले लो .हमने एक
आफिसर मेँ जाकर सौ वर्ष के लिए स्वयं ,अपने परिवार ,उत्तराधिकारियोँ व
अपनी कमेटी के अधिकारियोँ को रहने के लिए लिखित अनुमति प्राप्त कर ली
.अधिकारी बोला कि इस मकान मेँ जो भी आया टिक न सका या फिर...हम बोले कि
सब प्रभु या मेरे कर्म की मर्जी ?

तीन दिन बाद यानि कि सोमवार ,10जून2013ई की रात.....


एक विशालकाय अजगर कमरे के सामने आ पहुँचा और -आ बाहर निकल .अपनी
अंतिम इच्छा बता .



हम शान्त पद्मासन मेँ बैठे थे कि

'कल ?'

रविवार,ज्येष्ठ शुक्ल .1,09/06/2013ई0 !11.00PM !



अधिकारी के यहाँ से आवास के लिए अधिकार पत्र लाने से पहले
हम कमरे के अंदर मेडिटेशन मेँ था .कमरे के बाहर सफेद कपड़ोँ मेँ मेरे
सहयोगी जन उपस्थित थे.इधर गोवा मेँ भाजपा कार्यकारिणी की मीटिंग का आज
आखिरी दिन था.जहाँ मोदी को अधिकार पत्र ?सन2014 लोकसभाचुनाव प्रचार समिति
का नरेन्द्र मोदी को प्रमुख बना दिया .जिसका देशभक्त जनता काफी दिनोँ से
इन्तजार कर रही थी.तमाम नगरोँ मेँ खुशियोँ की लहर छा गयी .यहाँ भी ढ़ोल
ढमाके बजने लगे व आतिशबाजी होने लगी.


हम मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर निकले .
एक किशोर लड़की बोली ,सर !मोदी चुन लिए गये .बरामडे मेँ रखी टीवी मेँ
नरेन्द्र मोदी को दिखाया जा रहा था .
हमने एक सेकण्ड भर के लिए अपनी दोनोँ आंखेँ बंद कीँ और आगे बढ़
गया. कुछ लोग मेरे पीछे पीछे चल दिए .
लगभग चार पाँच मिनट बाद ही हम अधिकारी के आफिस पहुँच गये थे .जहाँ
अधिकारी से आवास पत्र पाकर लोग फूले नहीँ समा रहे थे .
दृष्टा बन या कर्ता बन रहिए ,ये एक छोटा सा लक्ष्यपग है ,लक्ष्य काफी दूर
है .ऐसा हम बोले .


एक विशालकाय अजगर कमरे के सामने आ पहुँचा और -आ बाहर निकल .अपनी
अंतिम इच्छा बता .

हम आंख बंद कर कमरे मेँ बैटा था .


मन ,मस्तिष्क व कमरे मेँ आवाज गूँज रही थी -"परमात्मा हर वक्त
हमारे साथ है .हमारी कोई समस्या नहीँ है .जो भी समस्याएं हैँ वे सब मन
,शरीर व जगत की हैँ .हमारी नहीँ .हम तो परमात्मांश हैँ ."


हम जब उठ कर कमरे से निकलने को हुए तो स्वेत वस्त्रधारी अनेक जन आ
पहुँचे .एक जन बोले,सर!बाहर खतरा है .


"खतरा ,कैसा खतरा ?आत्मा या परमात्मांश को भी खतरा .?"


हम कमरे से बाहर ज्योँ ही निकला तो विशालकाय अजगर ने फुस्कार लगायी.

" ठहरो ,हमेँ खुशी है कि आप हमारे पास आये .हम धन्य हुए .हमारा ये
शरीर व इस शरीर को मौत भी आपके काम आयेगी ,हमेँ खुशी होगी ."


" तू तो डरता ही नहीँ.मैने तो सुना था तू तो बड़ा बुजदिल व कायर है ."


"अपने मिशन मेँ कैसी कायरता व बुजदली ?ब्रह्म के साथ या सत संग के
साथ कैसी कायरता व बुजदली ?जो दबंगता व साहस को लिए घूमते हैँ अपने
स्वार्थोँ या उन्माद मेँ लिए घूमते हैँ ."


अजगर बोला ,अच्छा अपनी अंतिम इच्छा बता .

"अन्तिम इच्छा?मेरी अन्तिम इच्छा पूरी करने की क्षमता रखते हैँ आप ?"

अजगर तेजी से फुस्कारा ,मेरा क्रोध क्योँ बढ़ाता है तू ?


" हम क्रोध बढ़ाते हैँ ?अपनी गुस्सा पूरी उतार लेँ आप ."


"तू कैसा इन्सान है?मरने से नहीँ डरता,अच्छा अपनी अन्तिम इच्छा बता ."


"पहली बार मिले हो बातचीत कर लो .अपना मन्सूबा पूरा कर लेना .मेरे
शरीर को मारना चाहता है ,मार देना."

"शरीर को ?"

कुछ देर तक खामोशी छायी रही .

"अच्छा मरने को तैयार हो जा ."

"हम शरीर नहीँ हैँ.आप मेरे शरीर को ही मार सकते हो हमेँ नहीँ ."

"तुम कौन हो ?"

"आप हमसे पूछते हो ?आप पिछले जन्म मेँ एक महान संत थे .आप....."


फिर खामोशी छा गयी .


कुछ देर बाद एक सर्प ने आकर एक मणि उगल दी .


अजगर बोला ,लो ये मणि लो .


"हमारी आवश्यकताएं पूरी होती रहेँ ,बस.ये मणि हमेँ नहीँ चाहिए ."

"अपने सिर पर धारण करो इसे ."


हम मुस्कुराये "अपने सिर पर धारण करेँ इसे ?नहीँ ."

"अब ये तुम्हारे लिए ही है ."


वह मणि फिर हमारे माथे पर समा गयी .

--
संस्थापक <
manavatahitaysevasamiti,u.p.>

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