रविवार, 30 जून 2013

तन इन्साँ आत्मा मुसलमान ?

हम भी इंसान हैँ वो भी इंसान हैँ
हिन्दू मुसलमाँ सिक्ख ईसा-
हम सब एक हैँ ये नाम यहीँ के

हमसब एक हैँ हम भी इंसान हैँ .


कुदरत ने न बनायी जातियाँ हैँ

कुदरत के न बनाये ये मजहब हैँ ,

इन्सान को कुचलने वालोँ को कुचल दो

हम सब एक हैँ हम भी इन्सान हैँ .


हमारा मन रोया दिल तड़फा है

किसलिए ?इसलिए कि जाति मजहब ने ,

जाति मजहब ने हमारा ईमान तोड़ा है .


दोष था इतना हमारा-

हमने न खुदा ढ़ूँढ़ा धर्मस्थलोँ मेँ

हर इन्सान लगा काफिर हमेँ

खुदा की ही बनायी वस्तुओँ को रौंदा है .


अपने को पहचान दो ,

अपने को क्या इन्सान पहचाना है ?

हम सब एक हैँ ,हम सब एक हैँ ,

हमसब एक है हम भी इंसान हैँ .

<ASHOK KU. VERMA 'BINDU'>
--
संस्थापक <
manavatahitaysevasamiti,u.p.>

कोई टिप्पणी नहीं: