शुक्रवार, 26 मार्च 2010

: दीन- ए- इलाही:आवश्यकता एक सैकयूलर फोर्स की





देश के समक्ष सभी समस्याओँ की जड़ है -हमारा मन, जो कि अध्यात्मिक शिक्षा एवं विधि साक्षारता के बिना नहीँ संवारा जा सकता है . देश के सामने सबसे बड़ी बिडम्वना यह है कि आदर्शात्मक व्यवहार के लिए साहस का अभाव एवं संविधान के अनरूप चलने वालोँ को पुलिस तथा वकीलोँ की ही मदद न मिल पाना . भ्रष्टाचार ,बहुलवाद, क्षेत्रवाद ,साम्प्रदायिकता, दबंगवाद ,आदि मेँ दब कर व्यवहार मेँ संवैधानिक उद्देश्य समाप्त होने लगते हैँ . ऐसे मेँ संवैधानिक वातावरण बनने के बजाय मनमानी, पक्षपात ,दबंगवाद का शिकार हो अन्दर ही अन्दर मानसिक अशान्ति , असन्तुष्टि एवं अलगाव के बीज उत्पन्ऩ कर देता है.ऐसे मेँ विचलन , पलायन तथा मानसिक दूरियाँ पैदा होकर ऐसे लोगोँ का साथ पा जाती हैँ जो व्यक्ति को या तो अपराध या अध्यात्म की और मोड़ देती हैँ .अध्यात्म की ओर तो विरलोँ का ही झुकाव होता है, हाँ !ऐसा तो हो सकता है कि व्यक्ति तन्हा एवं एकाकी मानसिकता से ग्रस्त हो कर पागल विछिप्त हो जाए या आत्म हत्या कर बैठे . कुप्रबन्धन एवं भ्रष्टाचार के लिए अध्यापक पुलिस वकील नेता एवं आध्यात्मिक नेता दोषी हैँ. जब यह ही संविधान एवं अध्यात्म के प्रति जागरुक नहीँ हैँ तो अन्य से कैसे उम्मीद की जाए? ऐसे मेँ यदि लोग विचलित हो कर अपराध अलगाववाद आतँकवाद नकसलवाद आदि के शिकार हो जाएँ तो ऐसे मेँ अपराध, अलगाववाद, आतँकवाद, नकसलवाद और भी क्या कोई दोषी नहीँ कि अपराधी ,अलगाववादी, आदि ही सिर्फ दोषी है.विभिन्न समस्याओँ के निदानोँ का अध्ययन क्या सिर्फ पढ़कर अंकतालिकाएँ इकट्ठा करने या सेमीनार तक ही रखने एवं उनकी व्यवहार मेँ बात करने वाले को सनकी पागल कहने या उनको झूठ के सहारे फँसा देना है? यदि सभी समस्याओँ की जड़ हमारा मन है तो ऐसे मेँ आध्यात्मिक शारीरिक शिक्षा तथा वकील पुलिस व शिक्षक वर्ग के लिए आचरण मेँ विधि कठोरता आवश्यक है .एक नकसलवादी विचारक का कहना ठीक ही है कि जो कानून का पालन कराने वाले एवं संरक्षक हैँ वे अपने जीवन मेँ कानून का क्या 25 प्रतिशत भी पालन करते है? वकील पुलिस एवं शिक्षक वर्ग का संवैधानिककरण कर भावी सैकयूलर फोर्स का अंग बनाना आव श्यक है. देश मेँ एक ऐसे सैकयूलर फोर्स की आवश्यकता है जो राष्ट्र की विभिन्न समस्याओँ के निदानात्मक व्यवहार या संवैधानिक जीवन मेँ लगे हैँ उनकी हर हालत मेँ मदद करे.जिसके लिए कुर्बानी क्योँ न करनी पड़े. साथ मेँ राजनैतिक स्तर पर वोट की राजनीति से हट सद्भावना एवं भाई चारे की स्थापना के लिए शेर शाह सूरी एवं सम्राट अकबर से प्रेरणा लेनी आवश्यक है. अन्तर्जातीय विवाह प्रेम विवाह जातिवाद विरोधी व्यवहार आदि रखने वाले व्यक्तियोँ को हर हालत मेँ मदद पहुँचायी जाए तथा ऐसोँ को भी आरक्षण दिया जाए. वाह भाई वाह !संविधान विरोधी, जातिगत, क्षेत्रीयगत ,सम्प्रदाय गत, आदि लोगोँ को संरक्षण लेकिन संवैधानिक जीवन जीने वालोँ को दर दर की ठोकरेँ!? हाँ ,दूसरी और यह भी-देश मेँ सबसे सुरक्षित- आतँकवादी कसाब! जिन्दा आम आदमी की कीमत जानवरोँ से भी कम .

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