गुरुवार, 20 सितंबर 2012

लहसुन प्याज बनाम सत्विकता !

स्वस्थ्य शिक्षा के बिना हमारी शिक्षा अधूरी है .हमारे ऋषियोँ मुनियोँ ने आयुर्वेद के अन्तर्गत हमेँ बताया कि हमेँ अपने शरीर व मन के लक्षणोँ व दशा को जान उसके उपचारात्मक खानपान व आचरण करना चाहिए .अपने शरीर के प्रबंधन के साथ साथ मन का प्रबंधन भी आवश्यक है . मन को सात्विक दिशा व दशा दिए बिना हम स्वस्थ जीवन की कल्पना नहीँ कर सकते.सात्विकता सिर्फ सात्विक भोजन से ही नहीँ आती .हमारा नजरिया ,कर्म व लक्ष्य भी सात्विक होना चाहिए.कुछ व्यक्ति लहसुन प्याज का इस्तेमाल नहीँ करते लेकिन अपने कर्म व विचारोँ से सात्विक नहीँ होते .आयुर्वेद मेँ लहसुस व प्याज का महत्व कम नहीँ .
हमेँ सात्विक भोजन के साथ साथ अपना नजरिया भी सात्विक रखना चाहिए .सात्विक नजरिया के बिना सात्विक भोजन का महत्व कितना ?आठ योगांगोँ मेँ से यम ,नियम ,प्राणायाम ,ध्यान को अपने दैनिक आचरण मेँ उतारना अति आवश्यक है .

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