शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

मिशन पार्लियामेंट : स्वस्थ संसदीय कार्यवाही क्यों नहीँ?

एक वे आतंकवादी थे जो कि संसद को बमों से उड़ा देना चाहते थे.दूसरी ओर देश के अन्दर कुछ गद्दार हैं जो संसद को चलने नहीं देना चाहते हैँ.अब अन्ना को मिशन पार्लियामेंट चलाना चाहिए.सांसदों के लिए पाठशाला की व्यवस्था की जाए.ये सांसद आखिर चाहते क्या हैँ?जनता के द्वारा चुने गये प्रतिनिधि संसद मेँ जनता की आवाज पर स्वस्थ सम्वाद नहीं कर सकते?जनता की आवाज इन्हेँ सुनाई नहीँ देती.चीन पाक सीमा पर इन दो दिनों से जो हरकतेँ चल रही हैँ वे दिखाई नहीं दे रही हैँ.ये सांसद क्या अपनी या अपने चमचों की सुनना चाहते हैँ सिर्फ?कहाँ खो गया देश का क्षत्रियत्व?देश की जनता को क्या अर्जुन बन गाण्डीव उठाना होगा?आदि काल से ही भारत की शरहदे छोटी होती आयीं क्या आगे भी छोटी होती रहेँगी.मराठे जाग चुके हैं ये मुसलमानोँ तुम भी यदि जाग जाओ तो फिर पाक,कश्मीर, भारत व बांग्लादेश मिल कर भारतसंघ बन सकता है.
अन्ना के इस आन्दोलन से दूसरी आजादी की जंग छेंड़ी जा सकती है लेकिन पहले अन्ना आन्दोलन को आगे बढ़ाना होगा.भ्रष्टाचारमुक्त तंत्र बनाना होगा.इसके बाद गांव सुधार को जंग छेंड़ना होगा.संसदों विधायकों को जन प्रतिनिधि का मतलब समझाना होगा....

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मेरें Nokia फ़ोन से भेजा गया

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