शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

श्री अर्द्धनारीश्वर ���क्ति पीठ,ब्रह्मवाक्�� स्मारिका 20 10का विमोचन व मकर सक्रान्ति कार्���क्रम!

श्री राजेन्द्र प्रताप सिँह भैया जी संस्थापक श्री अर्द्धनारीश्वर शक्ति पीठ नाथ नगरी बरेली के आशीर्वाद से.......




ओ3म आमीन! ! ओम तत सत! ओ3म आमीन!!
12.45PM से हवन व भजन कीर्तन प्रारम्भ हो चुका था.इंवर्टिस विश्वविद्यालय कुलाधिपति श्री उमेश गौतम के आगमन के दो मिनट बाद 3.40PMपर पाण्डाल मेँ राजेन्द्र प्रताप सिँह भैया जी ने प्रवेश किया.कुछ औपचारिकताओँ के बाद श्री उमेश गौतम जी के द्वारा स्मारिका का विमोचन हो गया.मैँ भी कुछ बोलूँ ,इस सोँच पर मैँ मन से असन्तुलित हो गया .ऐसे सगुण स्थूल स्तर के धार्मिक कार्यक्रमोँ मेँ स्वयं को विवादित होने से डरता रहा हूँ.मैँ कबीर,वैदिक दर्शन,बुद्ध जैन दर्शन,सभी पन्थोँ के समान तत्वोँ,आदि से प्रभावित रहा हूँ.हाँ,श्री अर्द्धनारीश्वर शक्ति अवधारणा के पीछे के निर्गुण विचारधारा से प्रभावित रहा हूँ.
दक्षिण वाम शक्ति का साम्य है श्री अर्द्धनारीश्वर शक्ति ! यही से अद्वेत की यात्रा प्रारम्भ होती है.दक्षिण और उत्तर ध्रुव का मिलन.....ज्ञान व कर्म का मिलन.....धन व ऋण का मिलन .......दुख सुख का मिलन.........राग विराग का मिलन........कायरता व साहस का मिलन ..........यह सब मिलन यानि कि दोनोँ और से प्रभावहीन,तटस्थ. कमेस्ट्री हो या फिजिक्स या फिलासफी ,सबका मूल दो तत्वोँ के बीच की ऊर्जा के वखान के बिना अपूर्ण है.वन अपान जीरो इज क्वल्टू अनन्त..........




बुद्धवार,19 जनवरी 2 011ई0 ओशो पुण्य तिथि!
पौष मास का आज अन्त! कल से माघ माह का प्रारम्भ ,आज का दिन अन्य दिनोँ की अपेक्षा कहीं ज्यादा ही मैँ प्रफुल्लित था.लगभग 4.15PM पर मैँ विद्यालय कमेटी के वरिष्ठ सदस्योँ मेँ से एक श्री संजीब अग्रवाल की दुकान पर स्मारिका के साथ पहुँचा.



"सर जी नमस्ते,आपके लिए यह पत्रिका लाया हूँ."


उन्हेँ पत्रिका देने के साथ मैँ "अच्छा मैँ चलता हूँ"कहते हुए तेजी के साथ दुकान से नीचे आ कर आगे बढ़ गया.


मीरानपुर कटरा मेँ मैँ उन्हेँ व उनके परिवार को एक आध्यात्मिक शक्ति मानता रहा हूँ.उनको लेकर मैने कुछ आध्यात्मिक एहसास भी किए हैँ.



आगे कुछ दूरी पर ही मुझे अध्यापक मनोज गंगवार मिल गये.

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