सोमवार, 30 अगस्त 2010

यूरोपीय नस्लेँ : आधुन��क दुनियाँ

यूरोप क्रान्ति के बाद 17 वीँ सदी से भौतिक परिवर्तन तो प्रारम्भ हुए सोँचने व सांसारिक तथ्योँ से प्रेरणा लेने ढंग मेँ भी बदलाव हुए.सत्तावाद व पूँजीवाद ; जो कि स्वार्थी , श्वेतवसन अपराधियोँ और असमाजिक तत्वोँ को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप सहारा दे कर समाज मेँ सच्चे भोले व्यक्तियोँ को बड़ी खूबसूरती के साथ ठगते रहे हैँ.समाज के ढर्रे से हट कर विभिन्न हृदयजीवी,बुद्धिजीवी प्रतिभाओँ के अवसरोँ पर आघात करते रहे. अपने से आगे बढ़ने वालोँ को देख उनके रास्ते पर अवरोध लगाते रहे.कुछ वर्ग विशेष समाज के बहुसंख्यक तबकोँ के साथ दबाववादी नीतियाँ अपनाते रहे.दास प्रथा,बन्धुआ मजदूरी,छुआ छूत, आदि इसके उदाहरण हैँ.




सैकड़ोँ वर्ष पहले वराह मिहिर व कुछ दशक पूर्व मुंशी प्रेम चन्द्र यूरोपीय नस्लोँ की प्रशन्सा कर चुके हैँ.वराह मिहिर ने कहा था कि हमे यूनान के लोगोँ का सम्मान करना चाहिए क्योँकि वे विज्ञान मेँ पारंगत होते हैँ.मुंशी प्रेमचन्द्र ने कहा है कि भारतीय नस्लोँ की अपेक्षा यूरोपीय नस्लेँ बेहतर होती हैँ.ओशो ने 'नये भारत की खोज 'कहा है कि समस्याओँ की मुख्य जड़ है आदर्श व आचरण एक दूसरे के विपरीत खड़े हैँ.भारत का व्यक्ति सब कुछ जानने के बाद भी वह नहीँ कर सकता जो कि आदर्श है,जो कि उसकी प्रतिभा है जो उसकी क्षमता व कर्त्तव्य है.दवंगता व मनमानी करने की स्वतन्त्रता जरूर है यहाँ,लेकिन अपने कर्त्तव्योँ,ईमानदारी ,न्याय,आदि के आधार पर चलने की नहीँ,अपने प्रतिभा या अन्वेषण के आधार पर नहीँ.




आधुनिक दुनिया मेँ साहसिक यात्राओँ व दुर्गम खोजोँ का इतिहास यूरोप का इतिहास है.




हालांकि...



द्वितीय विश्व के बाद यूरोपीय उपनिवेशवाद का स्थान अमेरीकी भौतिक उपनिवेशवाद ने लिया.आज विश्व के अनेक स्थितियोँ के लिए अमेरीका जिम्मेदार है.खैर....


16वर्षीय किशोरी व अमेरिकी नाविक एबी सदरलैँड के प्रति मेरी हमदर्दी है. उसके सलामती की दुआएँ हैँ.जो कि अकेले दुनिया का चक्कर लगाने निकली है.अभी जल्द उसे आस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट से करीब 3700किमी दूर देखा गया.आस्ट्रेलियाई मीडिया मेँ एबी सदरलैण्ड के पिता लारेँस के हवाले से कहा गया कि वह पूरी तरह ठीक है और अपनी नौका पर सवार है.इससे कुछ दिन पूर्व गुरुवार सुबह कैलिफोर्निया स्थित अपने परिवार से सेटेलाइट फोन सम्पर्क टूट गया था.आस्ट्रेलियाई अधिकारियोँ ने एबी सदरलैण्ड को चेता दिया था कि महासागर के सुदूर इलाकोँ मेँ सेटेलाइट फोन काम नहीँ करता .इन इलाकोँ मेँ 90 किमी प्रति घण्टे की रफ्तार से हवाएँ चलती हैँ और छह मीटर तक तक ऊँची तरंगे उठती हैँ.



इस अमेरिकी किशोरी की दीवानगी को मेरा शत शत नमन !



जिन्दगी मेँ कुछ खास करने के लिए दीवानगी आवश्यक है.मैँ विद्यार्थियोँ से कहता हूँ कि


अभी आप लोग पढ़ रहे हैँ,पढ़ाई पूरी करने के बाद आप चाहेँगे कि आय का साधन प्राप्त हो,फिर शादी,इसके बाद परिवार का पालन पोषण-आय प्राप्ति के क्षेत्र मेँ कार्य भ्रमण,आदि.आप सब हमेँ ऐसे महापुरुष का नाम बताओ जो इस सब के कारण प्रसिद्ध हुआ.नहीँ न,तभी तो कहता हूँ मैँ कुछ खास करने के लिए कुछ खास की दीवानगी या नशा पालना होगा.नशा ? हाँ,नशा.नशा कला का ,नशा संगीत या साहित्य का,नशा अन्वेषण का,नशा किसी खेल का,नशा राजनीति या समाज सेवा का,आदि.

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