रविवार, 4 जुलाई 2010

विवेकानन्द पुण्यतिथ��:04जुलाई

आषाढ़ कृष्ण 08,शीतलाष्टमी,दिनरविवार !

अन्त: प्रशिक्षण....

मन को कैसा रखेँ?कौन कितना जानता है?शरीर व इन्द्रियोँ के लिए जिए जा रहे हैँ.शान्ति,सन्तुष्टि,आनन्द,अध्यात्म,प्रेम,प्रार्थना,उदारता,आदि का सम्बन्ध मन से है.जिन्हेँ सिर्फ शारीरिक ऐन्द्रिक सुख व सांसारिक वस्तुओँ से प्राप्त नहीँ किया जा सकता.भाग्यहीनता,भाग्य,असफलता,सफलता,आदि तो सिर्फ हमारा नजरिया हो सकता है.ऋणात्मक विचार वाले जीवन मेँ कभी भी आनन्दित नहीँ हो सकते.तभी तो मेँ कहता रहा हूँ कि विचारोँ का बड़ा महत्व है.हमेँ निरन्तर विभिन्न माध्यमोँ से विचारोँ से साक्षात्कार आवश्यक है.जोकि अन्तर्प्रशिक्षण के लिए आवश्यक है.जो मेडिटेशन के आदि हो चुके हैँ ,उन्हेँ विचारोँ की दुनिया मेँ भी जाने की जरूरत नहीँ है.ऐसा तो ऋणात्मक विचार रखने वाले वहिर्मुखी व्यक्तियोँ को जरुरत होती है.ऋणात्मक विचार रखने वाले अन्तर्मुखी व्यक्तियोँ के लिए तो मेडिटेशन काफी है.पारिवारिक व सामाजिक कर्त्तव्योँ का निर्वाहन इस सब से हट कर है.यहाँ तो अन्त: प्रशिक्षण मूल केन्द्रित है.

अन्त: प्रशिक्षण कैसे?


इसके लिए पहले अपने मन के अन्दर पैदा होने वाले विचारोँ,भावनाओँ,इच्छाओँ,आदि का परिणाम व उनका विपक्ष भी जानना आवश्यक है.किस सोँच के कारण मन अशान्ति व खिन्नता मेँ आया ,इसका चिन्तन आवश्यक है.अशान्ति व खिन्नता के विरोध मेँ मन पर विचार हावी करना आवश्यक है.जिसके लिए कल्पनाशील होना भी आवश्यक है. जैसे कि मेरे मन मेँ किसी कारण से खिन्नता उत्पन्न हो जाती है तो मै अपने मन मेँ विचार ले आता हूँ कि खिन्नता न रखने से हमारा क्या नुकसान हो जाएगा?या खिन्नता रखने से क्या फायदा हो जाएगा?अपराधोँ के लिए कौन दोषी है-शरीर,इन्द्रियाँ या मन?

खैर....

देश का युवा वर्ग अपने जीवन के लिए क्या स्वामी विवेकानन्द के विचारोँ को महत्वपूर्ण मानता है ?क्या स्वामी विवेकान्द जी से प्रभावित है? क्या वह उनसे अपने जीवन के लिए प्रेरणा लेना चाहता है? क्या क्या स्वामी जी के जन्म दिवस को युवा दिवस मनाने की गलती की गयी ?जवानी है कुछ करने की ,वह भी क्या रुखे सूखे पुराने विचारोँ मेँ गवाँ देँ?बाइक.......मोबाइल....और गर्ल.....यह नहीँ तो जवानी नहीँ!
अरे,वैदिक विद्वानोँ का क्या कहना?......मेरा वश चले तो मैँ(आज के युवा) तो सलमान खाँ ,शाहरूख खान, रितिक रोशन,आदि के जन्मदिनोँ को युवा दिवस मनाने की माँग करता? बुरा लगा हो तो क्षमा करना.


हूँ.........आज का दिन मैने जहानी खेड़ा -मोहम्मदी रोड स्थित मकसूदपुर (लखीमपुर) मेँ बिताया.जहाँ मेँ कल 4.00PM पर पहुँचा था.यह मेरा वहाँ जाना पहली बार था.अभी कुछ देर पहले ही मैँ वहाँ से कटरा लैटा था.

1 टिप्पणी:

गिरिजेश राव ने कहा…

नायक विवेकानन्द को नमन करता हूँ।
मोबाइल, बाइक और गर्ल में कोई बुराई नहीं यदि दृष्टि स्पष्ट हो। दु:खद पक्ष यह है कि दृष्टि का ही अभाव है। स्पष्टता और उलझन तो बाद की बाते हैं।

कई ज़गहों पर ं की जगह ँ का प्रयोग खटकता है। ठीक कीजिए।