शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

जातिब्यबस्था के खिलाफ आगाज़???

ये अच्छी बात है कि अब आरक्षण के खिलाफ वातावरण बनने लगा है.हम भी आरक्षण के खिलाफ हैं,लेकिन आरक्षण की समाप्ति से पहले हम जातिव्यवस्था के खिलाफ कानून चाहते है.

संयुक्त राष्ट्र सङ्घ  व विश्व बैंक केंद्र सरकार से दो बार जातिव्यवस्था के खिलाफ कुछ करने के कह चुका है लेकिन इस सम्बन्ध में देश के अंदर कोई भी सरकार व संस्था जातिवाद के खिलाफ आंदोलनात्मक कार्यवाही नहीं चाहता.ये देश के सामने विडम्बना है कि लोग जातिगत आरक्षण के खिलाफ तो हो रहे हैं लेकिन अन्य जातिगत व्यवहारों  का विरोध नहीं क्र पाते,गैरजातियों में शादी का समर्थन नहीं कर पाते.

राष्ट्रिय एकता के लिए जातीबाद खत्म होना चाहिए ऐसा विधिज्ञ भी  मानते हैं..
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अंग्रेजी सरकार होती तो हम भी राजा राममोहन राय के पथ पर चल कर जातिप्रथा के खिलाफ कानून  बनबाने का प्रयत्न करते.अब हमें समझ आने लगा है कि समाजसुधारक क्यों नहीं चाहते थे कि अंग्रेज भारत छोड़ कर जाएँ? अम्बेडकर ने भी ठीक ही कहा था कि अधिकतर लोगों की आजादी का मतलब सत्ता परिबर्तन से है न कि आम आदमी की आजादी व सम्वैधानिक समान व्यबस्था?हमे तो आजादी भी संदिग्ध लगती है.इसका गवाह 200 वे फाइलें हैं जो अभी सार्बजनिक होनी बाकी हैं.

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