रविवार, 30 अगस्त 2015

ठहराव नहीं है जीवन

@ठहराव नहीं है --जीवन@
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कोई दिल पे ठहरा है.कोई दिमाग में ठहरा है.कोई पेट पे ठहरा है.कोई इंद्रियों पे ठहरा है.

यह ठहराव जीवन नहीं,चेतना नहीं,आत्मा नहीं.तब ऐसे में कैसे परमात्मा की ओर,खुदा की ओर?ठहरे हो जाति वाद में,ठहरे हो मजहब वाद में?ठहरे हो धर्म(अधर्म)स्थलों) पे?कहते हो हमें ईश्वर पर विश्वास है,खाक है---ईश्वर पर विश्वास??


आत्मा स्वतंत्रता है,परमात्मा स्वतन्त्रता है.जीवन स्वतन्त्रता है.वह मोहताज नहीं है--तुम्हारे इन ठहरावों का.

हम व जगत प्रकृति अंशहै व ब्रह्म अंश.जो।तुम्हारे इन ठहरावों का मोहताज नहीं.

ये संस्थाएं भी?आत्मा,परमात्माआदि के विधान से छोटे हैं,सस्थाएं बंधन हैं.
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A00226525
Ashok ku.verma"bindu"
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(shri ramchndrmisson ruhelkhnd)facebook

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