शुक्रवार, 23 सितंबर 2016


24 सितम्बर 1873: सत्य शोधक समाज की स्थापना
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4 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सतारा के कोटगन गांव में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले ने 24 सितम्बर 1873 ई को सत्य शोधक समाज की स्थापना की.गुलामगिरी व सर्वजनिक सत्य धर्म इनकी पुस्तकों के संग्रह हैं.इनका उद्देश्य दलितों ,महिलाओं व वंचितों को न्याय दिलाना था.



प्रथम आधुनिक शिक्षिका सावित्री फुले  उनकी पत्नी थीं.किसी जाति विशेष के पुरोहितों के बिना विवाह संस्कारों को उन्होंने बढ़ावा दिया व मुम्बई उच्च न्यायालय में उन्हें मान्यता दिलाई .


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सार्वजनिक सत्य धर्म !
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क्या है सार्वजनिक धर्म ? वह धर्म धर्म नहीं जो मानव जाति को एक न मान सके,ईश्वर को एक न मान सके.ईश्वर की बनाई चीजों का सम्मान न कर सके .
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सत्य शोधक समाज !
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सत्संगी कौन है? मुसलमान कौन है?हमारी नजर में वह जो सत में लीन है लेकिन संसार की चीजों में लीन नहीं है.अप्राकृतिक वस्तुओं में लीन नहीं है.समाज में कोई व्यक्ति हमें धार्मिक,आध्यात्मिक,ईश व्यक्ति नहीं  दीखता.सिर्फ शरीर व इन्द्रियोँ में जीने वाला कैसे धार्मिक,आध्यात्मिक,ईश भक्त ?

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गुलामगिरी!
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सभी गुलाम हैं -अप्राकृतिक  
के ,जातियो-मजहबी धारणाओं के .कोई ईश्वरीय विधान - प्रकृति विधान को न मान कृत्रिमता में जीता है.
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पुरोहितवाद बनाम जातिबाद!
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जातिबाद यदि गलत है तो एक विशेष जाति का प्रभाव क्यों?योग्यता को महत्व होना चाहिए.
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ashok kumar verma "bindu'"
.www.ashokbindu.blogspot.com

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