सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

बालिकाएं महानता को समझें!!

जो बालिकाएं आगे चल कर महान बनी उनके जीवन से प्रेरणा लेना हर बालिका का ध्येय होना चाहिए.
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कल्पना चावला की पुण्य तिथि पर हम बालिकाओं से कहना चाहेंगे कि वे कुल,समाज,जाति आदि की मर्यादाओं से निकल महान नारियों
,सम्विधान मर्यादाओं,शैक्षिक मूल्यों,सन्त बाणियों आदि से प्रेरणा ले आगे बढ़ें.
अपनी प्रतिभा से किसी प्रकार का समझौता न करें.
हम बालिकाओं से कहना चाहेंगे कि आधुनिकता/पश्चमीकरण से हटकर विवेकीकरण को स्वीकार करें.....महान बनी बालिकाओं के जीवन व विचारों को स्वीकार करें...विद्यार्थी जीवन का मतलब समझें..हमें अफ़सोस है कि 90'/, से ज्यादा विद्यार्थी विद्यार्थी जीवन का मतलब तक नहीं समझते .हमारे आर्ष विद्वानों व् आधुनिक शिक्षाविद्दों ने आबासीय शिक्षा व्यवस्था को महत्व दिया था.इसके पीछे कारण थे कि नई पीढ़ी सामाजिकता भी आबासीय स्कूल में सीखती थे.समाज का असर उन पर न पड़ता था..
ashok kumar verma "bindu"

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