शुक्रवार, 22 मार्च 2013

होली पर विशेष:व्रत व दिवसोँ का महत्व

जो हमसे दूर है या दूर जा रहा है उसका स्मरण कराते हैँ पर्व/दिवस .व्रत
का मतलब है -संकल्प या प्रतिज्ञा.संकल्प या प्रतिज्ञा कैसी व क्या?हम
पूरी जिन्दगी भूख , प्यास ,सेक्स आदि की पूर्ति व निर्जीव संसाधनोँ को
जुटाने मेँ लगे रहते हैँ.जिसके लिए हम प्रकृति का अति विदोहन तक के लिए
तैयार रहते हैँ.अपना व दूसरोँ का शरीर तक विकारयुक्त कर बैठते हैँ.तो ऐसे
मेँ संकल्प व प्रतिज्ञा क्या?


व्रत /दिवस व पर्व हमेँ व समाज को सुधारने के लिए होते हैँ व अपने
पूर्वजोँ के मूल्योँ को स्मरण के लिए लेकिन हम व समाज कितना सुधर रहे
हैँ?होली पर्व को ही लो,हम होली पर्व से अपने जीवन को क्या साधते
हैँ?क्या संकल्प व प्रतिज्ञा लेते हैँ?पर्व के नाम पर भी प्रकृति से
खिलवाड़.इससे तो अच्छे है संयुक्त राष्ट्र के पर्व जो प्रकृति के खिलाफ
कार्य नहीँ करवाते , प्रकृति विदेहन नहीँ करते.

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संस्थापक <
manavatahitaysevasamiti,u.p.>

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