गुरुवार, 7 मार्च 2013

08मार्च2013 : क्या है औरत?

औरत के इतिहास की शुरुआत कहाँ से होती है ?हिन्दू मत के अनुसार औरत के
इतिहास की शुरुआत श्री अर्द्धनारीश्वर स्वरुप के प्रकटीकरण से होती है
,गैरहिन्दू मत के अनुसार हजरत आदम के बायीं पसली से उत्पन्न हजरत हब्बा
से होती है ?वाम गुण धारी ही औरत है .
औ+रत;औ अर्थात and या also और या अन्य ,रत अर्थात लीन ,इस प्रकार -'अन्य
मेँ रत'. स्व अर्थात परमात्मा या आत्मा के अतिरिक्त अन्य मेँ लीन,पर मेँ
लीन ,प्रकृति मेँ लीन.औरत है तो आदम या शिव का ही अंश लेकिन आदम या शिव
तो स्व या परमात्मा या आत्मा मेँ लीन लेकिन औरत प्रकृति मेँ लीन अर्थात
प्रकृति भी .अन्य भी अर्थात सत के सिवा अन्य भी अर्थात अनन्त के सिवा
अन्य भी . स्त्री ;स त्र ई -त्र गुण सहित अर्थात तीनोँ गुण सहित या जो
प्रकृति तीनोँ गुणधारी . जो शिव या आदम के साथ दृश्य मेँ अस्तित्ववान है
,सम-सम्मान है,सम अस्तित्व मेँ है ,सम भोग मेँ है ,शिव या आदम का पार्वती
या हब्बा का सम अस्तित्व या संतुलन या सम्बंध (समबंध)ही सृष्टि है.
स्त्री के तीन रुप हैँ,प्रकृति,स्त्री स्थूल शरीर व सूक्ष्म स्त्री
शरीर.विभिन्न शरीर स्तरोँ -स्थूल ,भाव ,सूक्ष्म ,मनस ,आत्म ,ब्रह्म
,निर्वाण मेँ से प्रथम चार स्तर -स्थूल ,भाव ,सूक्ष्म व मनस ही स्त्री या
पुरुष है .स्त्री का स्थूल व सूक्ष्म शरीर पुरुष होता है .पुरुष का स्थूल
व सूक्ष्म शरीर पुरुष होता है .स्त्री का भाव व मनस शरीर पुरुष होता है
तथा पुरुष का भाव व मनस शरीर स्त्री होता है .महामिलन कब होता है ?सम भोग
कब होता है ? सम अस्तित्व कब होता है ?सम सम्मान कब होता है ?जब पुरुष को
अपने भाव व मनस शरीर की स्त्री समाज मेँ मिल जाती है व जब स्त्री को अपने
भाव व मनस शरीर का पुरूष समाज मेँ मिल जाता है .आज दाम्पत्य जीवन टुटने
या कलह का कारण इसका न होना ही है .स्त्री के गुण या स्त्रैणता है दया
,करुणा ,सेवा ,मानवता ,ममता,स्नेह आदि है .




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