सोमवार, 12 नवंबर 2012

आजकल के नेता ही प्रजातंत्र विरोधी ?

प्रजातंत्र मेँ नेता का मतलब क्या होना चाहिए? विभिन्न स्तर के नेताओँ को देखकर नहीँ लगता कि ये नेता प्रजातांत्रिक मूल्योँ का सम्मान करने वाले हैँ?ये नेता आमआदमी के न होकर जाति,मजहब, धन,बल आदि के ठेकेदारोँ,चापलूसोँ आदि के बीच अपना जीवन जीते हैँ.बैठकोँ,सत्र आदि के अतिरिक्त नेताओँ का समय जनता के बीच डोर टू डोर होना चाहिए,जिस भांति चुनाव के दौरान वे डोर टू डोर नजर आते हैँ.यदि ये वास्तव मेँ नेता हैँ तो अपनी जातिशून्य क्षेत्र से चुनाव लड़ने से क्योँ घबराते हैँ?यदि ये जनसेवक ही हैँ तो चुनाव के वक्त ही डोर टू डोर जनता के बीच सिर्फ क्योँ नजर आते हैँ?बाद मेँ या पहले जनता के बीच नजर क्योँ नहीँ आते?हर जाति व मजहब के आम आदमी के बीच ये क्योँ नहीँ नजर आते?क्या ये स्वयं कानून का उल्लंघन करते नजर नहीँ आते?या क्या ये अपराधियोँ का समर्थन करते नजर नहीँ आते?या क्या ये जनता की ओर से कुछ कड़ुए सत्य प्रश्नोँ का जवाब धैर्य से देने के लिए तैयार रहते हैँ?इसके बाबजूद कि ये जानते हैँ कि जनता को अधिकार है सूचना प्राप्त करने का.ये क्या अपने को जनता का सेवक मानते हैँ?क्या ये प्रजा के सम्मान मेँ तत्पर रहते हैँ ?

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