शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

14 नवम्बर : बाल दिवस (द्वारा:अशोक कुमार वर्मा 'बिन्दु')

14 नवम्बर पर मैं बाल दिवस मनाने को तो उत्साहित रहता हूँ लेकिन नेहरु जयन्ती के रुप में नहीं .देश की वर्तमान विडम्बनाओं के लिए मैं नेहरु को ही दोषी मानता हूँ सरस्वती कुमार.दादूपुर.वाराणसी का अपनी पुस्तक सलीब पर एक और ईशा मेँ लिखना है कि विभाजन के विरोध मेँ अडिग महात्मा गांधी की हत्या हुई .वर्तमान की सारी विडम्बनाओं के लिये जिम्मेदार हैं ,बेटन नेहरु पैक्ट यानी वशीकरण अभियाध .


नेहरु का सच्चा स्वरुप


लैरी कालिन्स दामिनिक लैपियर ने अपनी पुस्तक आधी रात को आजादी में लिखा है कि कैम्ब्रिज में उनके सहपाठियों की मंडली इतनी ऊंची थी कि उनमें से आज कोई प्रधानमंत्री बना था कोई वायसराय कोई महामना सम्राट के पद तक पहुंचा था तो कोई जेल का अधिकारी .बंकिघम पैलेस के सोने की थाल मेँ भोजन कर चुके थे .जिसमें वह भोजन भी हुआ करता था जो हिन्दू मुसलमानों के लिए निषिद्ध था.सात सालों में इन्होने इंग्लैण्ड का इतना कुछ ग्रहण कर लिया था कि वह बुरी तरह अभारतीय हो चुके थे. बेटन के वशीकरण अभियान का जादू सर्वाधिक यदि किसी पर चला तो नेहरु पर.

खैर छोंड़ो,शेष फिर...

बाल दिवस के अवसर पर कहूंगा कि बालश्रम कब रुके .?

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