शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

हृदय पुष्प: अलख

हृदय पुष्प: अलख: अलख जगाता हूँ हिंदी का सुनो सभी नर-नार। अपनी भाषा को अपनाओ करता समय पुकार। जागृति शंख बजाओ हिंद में हिंदी लाओ।। पापा-डैडी में प्यार कहा...

कोई टिप्पणी नहीं: