मंगलवार, 31 मई 2011

भारत स्वाभिमान आन्दो���न व अन्ना हजारे!

अच्छा है कि अन्ना हजारे देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराना चाहते हैं.डा ए पी जे अब्दुल कलाम का भारत को सन 2020ई0 तक महाशक्ति बनने का सपना भ्रष्टाचार से मुक्त हुए बिना अधूरा रह जाएगा . विभिन्न भविष्यवाणियों के अनुसार सन 2012 -2020ई0 का समय क्रान्तिकारी समय है.जिसकी दस्तक सन 2011ई0 के प्रारम्भ के साथ विश्व में घटने वाली घटनाओं से साबित है.देश के अन्दर भ्रष्टाचार के खिलाफ व काला धन वापस जमा करने की मांग सम्बन्धी आवाज बुलन्द होती जा रही है.अदालत व सरकार का भी इस कारण अब इस पर ध्यान गया है.बाबा रामदेव के द्वारा भारत स्वाभिमान यात्रा अभियान का देश में साकारात्मक असर पड़ा है .ऐसे मेँ अन्ना हजारे के अनशन ने देश के युवाओं में प्राण फूंकने का काम किया है.समाज में लोग कहते मिल जाते हैं कि ईमानदारी से चले तो घर भी बिक जाए .दुनिया में हम ही अपने कर्त्तव्यों को क्यों समझें ? ऐसा लोग कहते फिरते हैँ.बैसे अट्ठानवे प्रतिशत से भी अधिक व्यक्ति भेंड़ की चाल चलने वाले होते हैं.दो प्रतिशत से ज्यादा व्यक्ति समाज में बदलाव की नींव नहीं रखते हैं. लगभग दो प्रतिशत प्रबुद्ध वर्ग शायद ही अन्ना हजारे व बाबा रामदेव के साथ अगली पंक्ति में हो ? शेष प्रबुद्ध वर्ग कुप्रबन्धन व भ्रष्टाचार तन्त्र का ही अंग बने हुए हैं.समाज का मस्तिष्क कहे जाने वाले ब्राह्मण,उपदेशक,शिक्षक, आदि का ही नजरिया व जीवन लक्ष्य देख कर हमेँ ताज्जुब होता है.लोग कहते मिल जाते हैं कि पढ़े लिखों में सभ्यता नहीं रह जाती.इसमें कुछ तो सच्चाई अवश्य है. वर्तमान विश्व के लिए शिक्षित व्यक्ति ही दोषी है क्योकि अधिकतर शिक्षित व्यक्ति अपनी शिक्षा का सम्बन्ध भौतिकभोगवाद व निजी शारीरिक या ऐन्द्रिक इच्छाओं के लिए करते हैं.नैतिकता व संस्कार के लिए वे नहीं जीना चाहते.वे कहते फिरते हैं कि ईमानदारी पर उतर आये तो अपना घर भी बिक जाएगा.व्यक्ति का स्वाभिमान अब त्याग,संयम , उदारता ,सेवा, प्रेम , न्याय ,निष्पक्षता, सर्वमान्य तथ्य,आदि के स्थान पर निज स्वार्थ , स्वधुन, भौतिक सोंच , लोभ , , पक्षपात, निष्ठुरता,द्वेष, मतभेद , आदि को महत्व देने वाले देश में परिवारों,संस्थाओं , दलों,आदि पर हावी हैं.महाभारत(महान प्रकाश में रत) के लिए अर्जुन जैसे योद्धा श्री कृष्ण के गीता(कुरशान)के ज्ञान के अनुकरण के साथ चाहिए.आज के क्षत्रिय अर्जुन के क्षत्रियत्व की कसौटी पर बिलकुल खरे नहीं उतरते .जिस तरह आज के ब्राह्मणों के सामने ब्राह्मणत्व की चर्चा पर ब्राह्मणों की सुलग जाती है उसी तरह क्षत्रियों के सामने क्षत्रियत्व की चर्चा करने पर सुलग जाती है . आज के अपने को ब्राह्मण व क्षत्रिय मानने वाले जाति आधारित ब्राह्मणों व क्षत्रियों की अपेक्षा कबीर,ओशो,जय गुरुदेव, अन्ना हजारे ,बाबा रामदेव,आदि को सम्मान देना उचित समझूंगा .




आजादी के बाद अब अन्ना हजारे व बाबा रामदेव के महत्व को स्वर्णिम मानना उचित होगा .इन दोनो को एक मंच पर आकर दूसरी आजादी के लिए मुहिम चलानी होगी.यदि ये ऐसा नहीं करते तो फिर इनकी नियति पर संदिग्ध दृष्टि स्वाभाविक है. जो इनकी आलोचना करते हुए कहते हैं कि अन्ना हजारे व बाबा रामदेव दुश्मनों के साथ हैं.ऐसे विरोधियों को अपने अन्तर्मन में झांकना चाहिए .कुप्रबन्धन व भ्रष्टाचार का विरोध करने वाले कैसे किसी के दुश्मन हो सकते हैं?दुश्मन तो वे हैं जो कुप्रबन्धन व भ्रष्टाचार के सहयोगी बने हैं .अन्ना हजारे व बाबा रामदेव को दुश्मन पक्ष का बताने वाले भ्रष्टाचार व कुप्रबन्धन के खिलाफ खुल कर कारवाही करने की हिम्मत क्यों नहीं रखते?इसके बाबजूद कि वे शासन में हैं.



अन्ना हजारे व बाबा रामदेव के मध्य विवाद दुखकारी व कष्टदायक हैं.अरविन्द केजरीवाल का कहना ठीक ही है कि अगर प्रधानमंत्री को लोकपाल विधेयक के दायारे से बाहर रखा जाता है तो उनके अधीन आने वाले दस विभाग भी लोकपाल के दायरे से बाहर आ जाएंगे. मैँ और मेरे मित्र अन्ना के साथ हैँ.प्रधानमंत्री व मुख्यन्यायाधीश को भी लोकपाल बिल के दायरे में लाना चाहिए.विवाद आन्दोलन की गति को धीमा ही करेगा.जो देश में बदलाव की ललक रखता हैं,उन्हें निरन्तर परस्पर मुलाकात व सम्वाद आवश्यक है .सर्वमान्य सत्य विश्लेषण व संश्लेषण आवश्यक है.विवाद व मतभेद तब तक ही होते हैं जब तक नियति में खोट होती है व सत्य तक पहुंच नहीं होती .बदलाव की पहल पर विवाद उचित नहीं.हर हालत में हमें अन्ना हजारे,बाबा रामदेव,आदि का समर्थन करना चाहिए.जो इनके समर्थन में नहीं हैं,जरुर उनके दिल दिमाग में खोट है . काला धन भारत में आना ही चाहिए व भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बजना ही चाहिए .



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