मंगलवार, 29 मार्च 2011

भ्रष्ट देशों में भारत चौथे स्थान पर !

भ्रष्ट देशों में भारत चौथे स्थान पर !


तीन से तो अच्छा है !

हांगकांग की प्रमुख सलाहकार फर्म पीईआरसी के एक सर्वेक्षण मे यह तथ्य सामने आया है कि भारत भ्रष्टाचार के मामले मे फिलीपींस और कम्बोडिया जैसे देशों कि पंक्ति मे खड़ा है.एशिया प्रशान्त क्षेत्र के 16 देशों मे भ्रष्टाचार के मामले मे भारत चौथे स्थान पर है.चलो कोई बात नहीं तीन से तो श्रेष्ठ हैं ?और फिर इन सर्वेक्षण के चक्कर मे काहे पड़ना ?अपने काम मे लगे रहो,बिन रुपयों के तो धर्म का काम भी न हो.धर्म स्थल बढ़ रहे हैं .धर्मस्थलो मे भीड़ बढ़ रही है.यह सब क्या कम है?जानते नहीं क्या यह आध्यात्मिक देश है?धार्मिक देश है?करोड़ों का दान चढ़ जाता है मंदिरों मे?ईमानदारी मे तो अपना घर ही बिक जाए,ये धर्म की बात छोड़ो.अरे,बेईमानी भी करनी पड़ती है जी.परिवार का पेट पालना है,रिश्वत देनी पड़ जाती है इधर उधर,बच्चों की फीस भरनी ही पड़ती है स्कूल मे,उनको पास कराने के लिए अलग से रुपया चाहिए,बच्चों को नौकरी दिलवाने के लिए भी तो कुछ इक्कट्ठा करना है ,कही जुगाड़ हो गया तो चार पांच लाख तो अधिकारियों के मुंह पे मारना ही है.अरे,भक्ति ईमानदारी तो मन और दिल की है.आज की भागदौड़ मे हर दिन भगवान को याद कर लें,यह क्या कम है?हर इतवार को आर्यसमाज में होने वाले हवन में भी शामिल हो लेता हूँ,जहाँ सबसे ज्यादा ऊँची आवाज मे मै ही जयघोष लगाता हूँ-धर्म की विजय हो,धर्म का नाश हो! ईश्वर की मर्जी के बिना पत्ता तक नहीं हिलता.रामदेव बाबा आ तो गये है,वे देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनायेँगे.चार सौ लाख करोड़ रुपया जो विदेश में काला धन के रुप मे जो जमा है,वह वापस आयेगा तो कुछ हमारा भी भला होगा.जव तक चारपांच साल शरीर मे दम है,काम कर रहा हूँ.और फिर हम ठहरे कृष्णवंशी अहीर,जानते हो उन्होने अपनों के लिए चोरी तक की?अच्छा ,अब चलत हैं .बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैँ,बच्चों को पास कराने का ठेंका ले रखा हैँ.वा तयो जा 'च......'का शासन है,मुलायम के जमाने व मंत्री जी की मौजूदगी मे स्थायी सेन्टर के दौरान तो जलवे ही जलवे थे,लाखों रुपया कमा लिया.चलो कोई बात न डेढ साल बाद फिर अपनी सरकार होगी,हम अहीर जी जान लगा देंगे मुलायम की सरकार बनाने मे ?अरे,रमुआ तू का करन आओ यहाँ?


"भैया परीक्षा देन जात है,दस हजार रुपया मगात हैं"


अच्छा आत हैं,तू भी चिन्ता मत कर, दो साल बाद अपनी अपनी सरकार होगी तो तुझे भी हाईस्कूल करवाके ही दम लेंगे.तेरे भैया का देखो बीएससी पूरा होने जा रहा है,कौन कहता रुपयों मे दम नहीं होती?और फिर तुम लोगों की शादी मे रुपया बसूल कर लेंगे.




ओह !यह नजरिया....


धन्य धार्मिक व आध्यात्मिक देश के धार्मिक व आध्यात्मिक लोग?



हम तो ठहरे अधार्मिक गैराध्यात्मिक असफल पागल सनकी.......बस,अपने ब्लाग के शीर्षक का नाम<सामाजिकता के DANSH>रख कर ऊंटपटाँग बातें लिख सकता हूँ और आज के सामाजिक व्यक्तियों की भीड़ मे मै तो ठहरा असमाजिक , बेकार व पलायनवादी व्यक्ति...



शेष फिर.....



अशोक कुमार वर्मा 'बिन्दु'



कोई टिप्पणी नहीं: