गुरुवार, 28 नवंबर 2013

01दिसम्बर 2013 : शैक्षिक संगोष्ठी

क्या शिक्षक का उत्तरदायित्व अपने विद्यालय तक ही सीमित है?

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सर्वपल्ली राधाकृष्णन का कहना था कि शिक्षक समाज का मस्तिष्क होता
है.यदि शिक्षक ज्ञान को अपना नजरिया बना उस आधार पर चलने लगे तो एक
क्रान्ति घटित हो जाए .शिक्षा के माध्यम से अनेक क्षेत्रोँ मेँ क्रान्ति
हुई लेकिन अफसोस अभी शिक्षा जगत मेँ क्रान्ति की जरुरत बनी हुई
है.वर्तमान शिक्षक को देख कर हमेँ अफसोस होता है ,शिक्षा कानून व शैक्षिक
प्रबंधन को लेकर.शिक्षक होने के नाते शिक्षक आम आदमी से भी ज्यादा गिरा
हो सकता है.ज्ञान के आधार पर शिक्षक से उम्मीदेँ स्वाभाविक हैँ .


( 1.50PM ,देवी प्रसाद कालेज ,शाहजहाँपुर)


एडस बचाव व स्वास्थ्य संरक्षण!
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सबसे बड़ा धन है-स्वास्थ्य.स्वास्थ्य दो प्रकार का होता है-शारीरिक व
मानसिक.'स्व' मेँ स्थित हुए बिना स्वास्थ्य नहीँ पूर्णता नहीँ.प्रकृति
मेँ मन को उलझाए रहने से सिर्फ भला नहीँ होने वाला. प्रकृति का प्रकृति
मेँ केन्द्र है-'काम'.'काम' क्योँ?सिर्फ सन्तान उत्पत्ति के
लिए.'स्व'क्या है ?'स्व' है-आत्मा या परमात्मा.हमारा शरीर है-'पर' .जो
प्रकृति अंश है.


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संस्थापक <
manavatahitaysevasamiti,u.p.>

प्रचार प्रमुख ,
भारत परिषद ,रुहेलखण्ड ,उप्र.

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