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शनिवार, 30 मई 2026

गीता का धर्म क्या है??

❓ धर्म क्या है? क्या धर्म सिर्फ मजहब, जाति, परंपरा है? या कुछ और…?
📖 श्रीकृष्ण कहते हैं: 👉 “सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज” अर्थ: 👉 सभी बने-बनाए धर्मों (बाहरी पहचान) को छोड़कर 👉 सत्य, चेतना और परमात्मा की शरण में आओ! ⚡ फिर सवाल उठता है: अगर सब धर्म छोड़ने हैं, तो “धर्म की रक्षा” का क्या मतलब है? 💡 गीता का उत्तर: ✔️ धर्म = कर्तव्य (Duty) ✔️ धर्म = सत्य का साथ ✔️ धर्म = न्याय और संतुलन ✔️ धर्म = मानवता + चेतना 🌍 जब-जब क्या नष्ट होता है? 👉 मजहब नहीं… 👉 सत्य, न्याय और मानवता का पतन होता है! तब-तब 👉 दिव्य शक्ति प्रकट होती है 👉 संतुलन (धर्म) को पुनः स्थापित करने! 🚩 निष्कर्ष: 👉 धर्म कोई “नाम” नहीं है 👉 धर्म कोई “सम्प्रदाय” नहीं है धर्म = सही कर्म + सच्ची चेतना ✨ संदेश: जाति, मजहब, लोभ, लालच से ऊपर उठो! अपने भीतर के सत्य धर्म को पहचानो! 📌 (www.ashokbindu.blogspot.com⁠�) ✍️ Ashok Kumar Verma “Bindu”

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