साल पहले ही इस निष्कर्ष पर पहुँच चुका हूँ कि भारतीय समाज विशेष रुय से
परिवार व स्कूल न्याय व्यवस्था से दूर हैँ .परिवार व स्कूल क्योँ ? इस
शरीर को धारण करने के बाद परिवार व स्कूल से ही वास्ता रहा है मेरा .मैँ
देख रहा हूँ कि इन्सान इतना गिर चुका है कि जिस कारण बने हालातोँ मेँ अब
सिर्फ सबूत व गवाह ही काफी नहीँ हैँ.व्यवस्थाओँ के ठेकेदार ही
चापलूसी,हाँहजूरी व निज स्वार्थोँ मेँ व्यवस्थाएं बिगाड़ने मेँ लगे
हैँ.ऐसे मेँ नियुक्तियोँ ,प्रत्याशी चयन व न्याय प्रणाली आदि मेँ नारको
परीक्षण व ब्रेन मेपिंग आदि भी अनिवार्य होना चाहिए .
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संस्थापक <
manavatahitaysevasamiti,u.p.>
